भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें: चरण, फ़ायदे और सावधानियाँ

भ्रामरी का मतलब है भँवरा। इस प्राणायाम में साँस छोड़ते समय नाक से हल्की "म्म्म" की आवाज़ निकाली जाती है, बिल्कुल भँवरे की गुंजन जैसी। यह सबसे आसान प्राणायामों में से एक है: 5 मिनट और एक शांत कोना, बस इतना चाहिए।
हमारी क्लास में इसे अक्सर प्रैक्टिस के आख़िर में करवाया जाता है, जब शरीर थका होता है और मन को शांत होना होता है।
कैसे बैठें
- सुखासन (पालथी), वज्रासन या कुर्सी पर, जिसमें कमर सीधी रहे।
- कंधे ढीले, जबड़ा ढीला, होंठ हल्के से बंद।
- ख़ाली पेट या खाने के 2 से 3 घंटे बाद। सुबह या सोने से पहले, दोनों अच्छे समय हैं।
भ्रामरी प्राणायाम के चरण
- कान बंद करेंदोनों अँगूठों से कान के आगे वाला छोटा हिस्सा (ट्रैगस) हल्के से दबाएँ। कान के अंदर उँगली न डालें।
- उँगलियाँ रखेंतर्जनी माथे पर, बीच की दो उँगलियाँ बंद आँखों पर हल्के से, और छोटी उँगली नाक के पास। आँखों पर दबाव न डालें। शुरुआत में सिर्फ़ कान बंद करना भी काफ़ी है।
- गहरी साँस लेंनाक से आराम से, गहरी साँस अंदर लें।
- गुंजन के साथ छोड़ेंमुँह बंद रखकर, नाक से धीरे साँस छोड़ते हुए "म्म्म" की हल्की, एक जैसी आवाज़ निकालें। आवाज़ सिर और चेहरे में महसूस होगी।
- एक राउंड पूरासाँस ख़त्म होने पर हाथ घुटनों पर रखें, एक सामान्य साँस लें। यह एक राउंड हुआ।
शुरुआत में 5 राउंड करें। आदत होने पर 7 से 10 राउंड, यानी 5 से 7 मिनट। आवाज़ ज़ोर से निकालने की ज़रूरत नहीं, हल्की और लंबी गुंजन ही सही है।
भ्रामरी प्राणायाम के फ़ायदे
- साँस छोड़ना लंबा होता है, जिससे मन शांत और शरीर ढीला महसूस होता है।
- दिन भर की बेचैनी या ग़ुस्सा ठंडा करने में मदद मिलती है।
- सोने से पहले करने पर कई लोगों को नींद आने में आसानी होती है। पढ़ें नींद के लिए योग।
- ध्यान से पहले मन को एक जगह लाने का अच्छा तरीक़ा है।
आम ग़लतियाँ
- कान में उँगली डालनासिर्फ़ ट्रैगस को हल्के से दबाएँ। उँगली अंदर डालने से कान को नुक़सान हो सकता है।
- आँखों पर दबावउँगलियाँ सिर्फ़ रखनी हैं, दबानी नहीं। कॉन्टैक्ट लेंस पहने हों तो आँखों पर उँगली न रखें।
- ज़ोर से आवाज़ निकालनागला छिलने जैसी आवाज़ नहीं चाहिए। हल्की गुंजन, जैसे कोई गाना धीरे से गुनगुनाते हैं।
- साँस रोकनाशुरुआत करने वाले राउंड के बीच साँस न रोकें। सामान्य साँस लेकर अगला राउंड शुरू करें।
कान में इन्फ़ेक्शन या दर्द हो तो भ्रामरी न करें। चक्कर आए तो रुककर सामान्य साँस लें। प्रेग्नेंसी, हाई BP या किसी भी बीमारी में पहले डॉक्टर से पूछ लें।
भ्रामरी के साथ अनुलोम विलोम भी करें तो अच्छा मेल बनता है: पहले 5 मिनट अनुलोम विलोम, फिर 5 राउंड भ्रामरी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भ्रामरी प्राणायाम कितनी देर करना चाहिए?
शुरुआत में 5 राउंड करें। आदत होने पर 7 से 10 राउंड, यानी लगभग 5 से 7 मिनट काफ़ी है।
भ्रामरी प्राणायाम कब करना चाहिए?
सुबह ख़ाली पेट या रात को सोने से पहले। खाने के तुरंत बाद न करें।
क्या भ्रामरी से नींद अच्छी आती है?
कई लोगों को सोने से पहले भ्रामरी करने से आराम महसूस होता है और नींद आने में आसानी होती है। अगर नींद की समस्या लंबे समय से है, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
क्या बच्चे भ्रामरी कर सकते हैं?
हाँ, यह आसान और सुरक्षित अभ्यास है। बच्चों को कान सिर्फ़ हल्के से बंद करना सिखाएँ और किसी बड़े की देखरेख में करवाएँ।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। कोई बीमारी, चोट या प्रेगनेंसी हो तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें।


